सातवां वेतन आयोग : केंद्रीय कर्मचारियों को झटका, अलाउंस में हुए बदलाव होंगे मार्च 2017 से लागू!

नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकार ने 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया है. वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के अलग-अलग वर्ग में वेतन आयोग की सिफारिशों से जुड़ी कई आपत्तियों पर सरकार ने समिति बनाकर दोनों पक्षों में बातचीत शुरू की. सरकार की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत के लिए जुलाई के महीने में तीन समितियों का गठन किया था. इन समितियों को कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके चार महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी.

लेकिन अब खबर है कि बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और सरकार ने इन समितियों का कार्यकाल 22 फरवरी 2017 तक के लिए बढ़ा दिया है.

उल्लेखनीय सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के लागू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतनमान पर अपनी असहमति जताई थी. और सरकार के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की थी. कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा था कि उन्हें वेतन आयोग की रिपोर्ट में घोषित न्यूनतम वेतनमान स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने सरकार द्वारा घोषित 18000 रुपये के न्यूनतम वेतनमान को 24000 रुपये करने की मांग की.

इसके अलावा वेतन आयोग द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले 196 भत्तों को सिकोड़कर केवल 55 पर सीमित करने का भी कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया था. वेतन आयोग ने 196 भत्तों में या तो कई को समाप्त कर दिया या फिर उनका विलय कर दिया. केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कई संगठनों ने इसका भी विरोध किया और मांग की कि कई भत्तें अंग्रेजों के समय से मिलते आ रहे हैं जिन पर रोक उचित नहीं है.

सरकार की ओर से भत्तों को लेकर उठे विवाद को सुलझाने के लिे वित्त सचिव अशोक लवासा के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया. इस समिति को चार महीने में रिपोर्ट देनी थी लेकिन अभी तक रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है. अब इस समिति के कार्यकाल को 22 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है.

वहीं, कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ाने के लिए हाल ही में आरबीआई प्रमुख उर्जित पटेल का बयान भी सामने आया है. उर्जित ने अपने एक बयान में कहा है कि यदि किसी भी प्रकार से सरकार कर्मचारियों के भत्तों में इजाफा करती भी है तो यह मार्च 2017 के बाद से लागू होगा. यानि के साफ है कि अब कर्मचारियों को बढ़ा भत्ता (अगर सरकार की समिति इस संबंध में रिपोर्ट पेश करती है और सरकार इसे स्वीकार करती है) मार्च 2017 के बाद अर्थात अगले वित्तवर्ष से ही मिलेगा.

जानकारी के लिए बता दें कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी के बाद उठे सवालों के समाधान के लिए सरकार की ओर से तीन समितियों के गठन का ऐलान किया गया था. सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में अलाउंस को लेकर हुए विवाद से जुड़ी एक समिति बनाई गई है. दूसरी समिति पेंशन को लेकर बनाई गई है और तीसरी समिति वेतनमान में कथित विसंगतियों को लेकर बनाई गई है.

Source NDTV

 

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